भारतीय न्याय संहिता 51 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 51 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 51 in Hindi – BNS 51 in Hindi

दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है- जब किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता है, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो

परन्तु यह तब जब कि किया गया कार्य दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम था और उस उक्साहट के असर के अधीन या उस सहायता से या उस षड्यंत्र के अनुसरण में किया गया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है।

इष्टांत-

  • (क) एक शिशु को य के भोजन में विष डालने के लिए क उकसाता है, और उस प्रयोजन से उसे विष परिदत करता है। वह शिशु उस उक्साहट के परिणामस्वरूप भूल से म के भोजन में, जो य के भोजन के पास रखा हुआ है, विष डाल देता है। यहां, यदि वह शिशु क के उकसाने के असर के अधीन उस कार्य को कर रहा था, और किया गया कार्य उन परिस्थितियों में उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम है, तो क उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस शिशु को म के भोजन में विष डालने के लिए उकसाया हो।
  • (ख) ख को य का गृह जलाने के लिए क उकसाता है। ख उस गृह को आग लगा देता है और उसी समय वहां सम्पति की चोरी करता है। क यद्यपि गृह को जलाने के दुष्प्रेरण का दोषी है, किन्तु चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी नहीं है; क्योंकि वह चोरी एक अलग कार्य थी और उस गृह जलाने का अधिसम्भाव्य परिणाम नहीं थी।
  • (ग) ख और ग को बसे हुए गृह में अर्धरात्रि में लूट के प्रयोजन से भेदन करने के लिए क उकसाता है, और उनको उस प्रयोजन के लिए आयुध देता है। ख और ग वह गृह-भेदन करते हैं, और य द्वारा जो निवासियों में से एक है, प्रतिरोध किए जाने पर, य की हत्या कर देते हैं। यहां, यदि वह हत्या उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम थी, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है।
See also  भारतीय न्याय संहिता 77 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 77 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 51 in English – BNS 51 in English

Liability of abettor when one act abetted and different act done- When an act is abetted and a different act is done, the abettor is liable for the act done, in the same manner and to the same extent as if he had directly abetted it:

Provided that the act done was a probable consequence of the abetment, and was committed under the influence of the instigation, or with the aid or in pursuance of the conspiracy which constituted the abetment.

Illustrations-

  • (a) A instigates a child to put poison into the food of Z, and gives him poison for that purpose. The child, in consequence of the instigation, by mistake puts the poison into the food of Y, which is by the side of that of Z. Here, if the child was acting under the influence of A’s instigation, and the act done was under the circumstances a probable consequence of the abetment, A is liable in the same manner and to the same extent as if he had instigated the child to put the poison into the food of Y.
  • (b) A instigates B to burn Z’s house, B sets fire to the house and at the same time commits theft of property there. A, though guilty of abetting the burning of the house, is not guilty of abetting the theft; for the theft was a distinct act, and not a probable consequence of the burning.
  • (c) A instigates B and C to break into an inhabited house at midnight for the purpose of robbery, and provides them with arms for that purpose. B and C break into the house, and being resisted by Z, one of the inmates, murder Z. Here, if that murder was the probable consequence of the abetment, A is liable to the punishment provided for murder.
See also  भारतीय न्याय संहिता 29 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 29 in Hindi & English
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