भारतीय न्याय संहिता 8 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 8 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 8 in Hindi – BNS 8 in Hindi

जुर्माने की रकम का जुर्माना आदि के भुगतान में व्यतिक्रम करने पर दायित्व-

(1) जहां वह राशि अभिव्यक्त नहीं की गई है, जितनी तक जुर्माना हो सकता है, वहां अपराधी जिस रकम के जुर्माने का दायी है, वह अमर्यादित है किन्तु अत्यधिक नहीं होगी।

(2) किसी अपराध के हर मामले में,-

  • (क) कारावास और जुर्माना दोनों से दण्डनीय अपराध के जिसमें अपराधी कारावास सहित या रहित, जुर्माने से दण्डादिष्ट हुआ है;
  • (ख) तथा कारावास या जुर्माने अथवा केवल जुर्माने से जिसमे अपराधी जुर्माने से दण्डादिष्ट हुआ है, वह न्यायालय, जो ऐसे अपराधी को दण्डादिष्ट करेगा. सक्षम होगा कि दण्डादेश द्वारा निदेश दे कि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में अपराधी अमुक अवधि के लिए कारावास भोगेगा जो कारावास उस अन्य कारावास के अतिरिक्त होगा जिसके लिए वह दण्डादिष्ट हुआ है या जिससे वह दण्डादेश के लघुकरण पर दण्डनीय है।

(3) यदि अपराध कारावास और जुर्माना दोनों से दण्डनीय हो, तो वह अवधि, जिसके लिए जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए न्यायालय अपराधी को कारावासित करने का निदेश दे. कारावास की उस अवधि की एक चौथाई से अधिक न होगी, जो अपराध के लिए अधिकतम नियत है।

(4) वह कारावास, जिसे न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने के लिए अधिरोपित करे, ऐसा किसी भांति का हो सकेगा, जिससे अपराधी को उस अपराध के लिए दण्डादिट किया जा सकता था।

(5) यदि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो तो वह कारावास, जिसे न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए अधिरोपित करे, सादा होगा और वह अवधि, जिसके लिए जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए न्यायालय अपराधी को काराचासित करने का निदेश दे निम्न मापमान से अधिक नहीं होगी, अर्थात्:-

  • (क) जब जुर्माने का परिमाण पांच हजार रुपए से अधिक न हो, तब दो मास से 5 अनधिक कोई अवधि; और
  • (ख) जब कि जुर्माने का परिमाण दस हजार रुपए से अधिक न हो, तब चार मास से अनधिक कोई अवधि, तथा किसी अन्य दशा में एक वर्ष से अनधिक कोई अवधि।
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(6) (क) जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए अधिरोपित कारावास तब पर्यवसित हो जाएगा, जब वह जुर्माना या तो चुका दिया जाए या विधि की प्रक्रिया द्वारा उद्गृहीत कर लिया जाए।

(ख) यदि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए नियत की गई कारावास की अवधि का अवसान होने से पूर्व जुर्माने का ऐसा अनुपात चुका दिया या उद्गृहीत कर लिया जाए कि देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास की जो अवधि भोगी जा चुकी हो, वह जुर्माने के 15 तब तक न चुकाए गए भाग के आनुपातिक से कम न हो तो कारावास पर्यवसित हो जाएगा।

दृष्टांत- क एक सौ रुपए के जुर्माने और उसके देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए चार नास के कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है। यहां यदि कारावास के एक मास के अवसान से पूर्व जुर्माने के पचतहर रुपए चुका दिए जाएं या उद्गृहीत कर लिए जाए तो प्रथम मास का अवसान होते ही क उन्मुक्त कर दिया जाएगा। यदि पचतहर रुपए प्रथम मास के अवसान पर या किसी भी पश्चातवर्ती समय पर जब कि क कारावास में हैं, चुका दिए या उद्गृहीत कर लिए जाएं, तो क तुरन्त उन्मुक्त कर दिया जाएगा। यदि कारावास के दो मास के अवसान से पूर्व जुर्माने के पचास रुपए चुका दिए जाए या उद्गृहीत कर लिए जाए. 25 तो क दो मास के पूरे होते ही उन्मुक्त कर दिया जाएगा। यदि पचास रुपए उन दो मास के अवसान पर या किसी भी पश्चात्वर्ती समय पर जब कि के कारावास में है, चुका दिए जाएं या उद्गृहीत कर लिए जाएं, तो के तुरन्त उन्मुक्त कर दिया जाएगा।

(7) जुर्माना था उसका कोई भाग जो चुकाया न गया हो, दण्डादेश दिए जाने के पश्चात् छह वर्ष के भीतर किसी भी समय, और यदि अपराधी दण्डादेश के अधीन छह वर्ष से 30 अधिक के कारावास से दण्डनीय हो तो उस कालावधि के अवसान से पूर्व किसी समय, उद्गृहीत किया जा सकेगा और अपराधी की मृत्यु किसी भी सम्पति को, जो उसकी मृत्यु के पश्चात् उसके ऋण के लिए वैध रूप से दायी हो, इस दायित्व से उन्मुक्त नहीं करती।

See also  भारतीय न्याय संहिता 12 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 12 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 8 in English – BNS 8 in English

Amount of fine, liability in default of payment of fine, etc.

(1) Where no sum is expressed to which a fine may extend, the amount of fine to which the offender is liable is unlimited, but shall not be excessive.

(2) In every case of an offence-

  • (a) punishable with imprisonment as well as fine, in which the offender is sentenced to a fine, whether with or without imprisonment;
  • (b) punishable with imprisonment or fine, or with fine only, in which the offender is sentenced to a fine, it shall be competent to the Court which sentences such offender to direct by the sentence that, in default of payment of the fine, the offender shall suffer imprisonment for a certain term, in which imprisonment shall be in excess of any other imprisonment to which he may have been sentenced or to which he may be liable under a commutation of a sentence.

(3)The term for which the Court directs the offender to be imprisoned in default of payment of a fine shall not exceed one-fourth of the term of imprisonment which is the maximum fixed for the offence, if the offence be punishable with imprisonment as well as fine.

(4) The imprisonment which the Court imposes in default of payment of a fine or in default of community service may be of any description to which the offender might have been sentenced for the offence.

(5) If the offence is punishable with fine or community service, the imprisonment which the Court imposes in default of payment of the fine or in default of community service shall be simple, and the term for which the Court directs the offender to be imprisoned, in default of payment of fine or in default of community service, shall not exceed for any term not exceeding,-

  • (a) two months when the amount of the fine shall not exceed five thousand rupees; and
  • (b) four months when the amount of the fine shall not exceed ten thousand rupees, and for any term not exceeding one year in any other case.

(6) (a)The imprisonment which is imposed in default of payment of a fine shall terminate whenever that fine is either paid or levied by process of law;

See also  भारतीय न्याय संहिता 117 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 117 in Hindi & English

(b) If, before the expiration of the term of imprisonment fixed in default of payment, such a proportion of the fine be paid or levied that the term of imprisonment suffered in default of payment is not less than proportional to the part of the fine still unpaid, the imprisonment shall terminate.

Illustration- A is sentenced to a fine of one thousand rupees and to four months’ imprisonment in default of payment. Here, if seven hundred and fifty rupees of the fine be paid or levied before the expiration of one month of the imprisonment, A will be discharged as soon as the first month has expired. If seven hundred and fifty rupees be paid or levied at the time of the expiration of the first month, or at any later time while A continues in imprisonment, A will be immediately discharged. If five hundred rupees of the fine be paid or levied before the expiration of two months of the imprisonment. A will be discharged as soon as the two months are completed. If five hundred rupees be paid or levied at the time of the expiration of those two months, or at any later time while A continues in imprisonment, A will be immediately discharged.

(7) The fine, or any part thereof which remains unpaid, may be levied at any time within six years after the passing of the sentence, and if, under the sentence, the offender be liable to imprisonment for a longer period than six years, then at any time previous to the expiration of that period; and the death of the offender does not discharge from the liability any property which would, after his death, be legally liable for his debts.

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