भारतीय न्याय संहिता 113 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 113 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 113 in Hindi – BNS 113 in Hindi

स्वेच्छया उपहति कारित करना- (1) जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है।

(2) जो कोई धारा 120 की उपधारा (1) के अधीन उपबंधित मामले के सिवाय स्वेच्छया उपहति कारित करता है, दोनों में से किसी एक वर्णन के कारावास से जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो दस हजार तक का हो सकेगा या दोनों से दंडित किया जाएगा।

Bharatiya Nyaya Sanhita 113 in English – BNS 113 in English

Voluntarily causing hurt- (1) Whoever does any act with the intention of thereby causing hurt to any person, or with the knowledge that he is likely thereby to cause hurt to any person, and does thereby cause hurt to any person, is said “voluntarily to cause hurt”.

(2) Whoever, except in the case provided for by sub- section (1) of section 120 voluntarily causes hurt, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine which may extend to ten thousand rupees, or with both.

See also  भारतीय न्याय संहिता 33 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 33 in Hindi & English
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