भारतीय न्याय संहिता 116 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 116 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 116 in Hindi – BNS 116 in Hindi

खतरनाक आयुधो या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना- (1) उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 120 की उपधारा (1) में उपबंध हैं, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या किसी संक्षारक पदार्थ द्वारा या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा, जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव शरीर के लिए हानिकारक है, या किसी जीवजन्तु द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

(2) जो कोई धारा 120 की उपधारा (2) में उपबंधित दशा के सिवाय, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी साधन से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, आजीवन कारावास या दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडनीय होगा, जो एक वर्ष से कम नहीं होगा किंतु दस वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

Bharatiya Nyaya Sanhita 116 in English – BNS 116 in English

Voluntarily causing hurt or grievous hurt by dangerous weapons or means- (1) Whoever, except in the case provided for by sub-section (1) of section 120,voluntarily causes hurt by means of any instrument for shooting, stabbing or cutting, or any instrument which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, or by means of fire or any heated substance, or by means of any poison or any corrosive substance, or by means of any explosive substance or by means of any substance which it is deleterious to the human body to inhale, to swallow, or to receive into the blood, or by means of any animal,shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine which may extend to twenty thousand rupees, or with both.

(2) Whoever, except in the case provided for by sub-section (2) of section 120, voluntarily causes grievous hurt by any means referred to in sub–section (1), shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

See also  भारतीय न्याय संहिता 58 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 58 in Hindi & English
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