Types of Court in India? | भारत में न्यायालयों के प्रकार? | कोर्ट कितने प्रकार के होते है?

Types of Court in India in Hindi:- भारत एक लोक-तान्त्रिक देश है किसी भी देश में कानून व्यवस्था को सही ढंग से चलाने के लिए न्यायालय (कोर्ट) की जरूरत होती है। ओर न्यायालय (कोर्ट) में हर आदमी को एक सामान देखा जाता है। भारत में हर इंसान को न्यायालय (कोर्ट) की जानकारी होनी चाहिए। क्या आपको पता है कि भारत में कितने प्रकार के न्यायालय हैं? अगर आपको नहीं मालूम है, तो इस आर्टिकल में आप जान पाएंगे कि भारत में कितने प्रकार के न्यायालय है? Types of Court in India? ओर साथ में उनका कार्यभार क्या है इसके बारे में भी बात करेंगे।

Types of Court in India in Hindi
Types of Court in India in Hindi

भारत में न्यायालयों के प्रकार? – Types of Court in India?

  1. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
  2. उच्च न्यायालय (High Court)
  3. जिला और अधीनस्थ न्यायालय
  4. ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय
  5. फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court)
  6. लोक अदालत (Public Court)

अब इन सभी न्यायालय (कोर्ट) को विस्तार से समझते हैं –

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)

यह देश का शीर्ष न्यायालय है इसका मुखिया प्रधान  न्यायाधीश होता है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना अट्ठाईस जनवरी उन्नीस सौ पच्चास (28 -01 -1950) को हुई थी। वर्तमान में डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल पैंसठ वर्ष (65) की आयु तक का होता है। वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चौतीस (34) न्यायाधीश और एक (1) मुख्य न्यायाधीश हैं। देश की विभिन्न सरकारों के बीच विवादों का निपटारा भी सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में किया जाता है। यह पुरे भारत के किसी भी कोर्ट के कार्यो में हस्तक्षेप कर सकता है।

उच्च न्यायालय (High Court)

भारत में कुल पच्चीस (25) उच्च न्यायालय (High Court) हैं। यह केवल अपने राज्य स्तर पर सीमित होते हैं ओर अपने राज्यों के विवादों को निपटारा करता हैं। उच्च न्यायालय (High Court) का मुख्य काम निचली कोर्ट की अपील और रिट याचिका का निपटारा करना होता है। कोलकाता उच्च न्यायालय (High Court) देश का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है। ओर भारत का सबसे नया उच्च न्यायालय (High Court) आंध्र प्रदेश के अमरावती में स्थित आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) है।

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जिला और अधीनस्थ न्यायालय

जिला और अधीनस्थ न्यायालय को देश के जिला स्तर तक न्याय देने के लिए बनाया गया है। इसलिए इसको जिला और अधीनस्थ न्यायालय कहा जाता है। इसमें जिला न्यायाधीश सभी सिविल मामलों, फॅमिली मैटर और आपराधिक मुकदमो की सुनवाई करते हैं। सभी जिला और अधीनस्थ न्यायालय उच्च न्यायालय (High Court) के नियंत्रण में काम करते हैं।

ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय

ऐसा एक व्यक्ति या संस्था जिसके पास न्यायिक काम करने का अधिकार हो उसको ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय कहते है। ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय को कुछ खास विषयों के मामले को देखने के लिए बनाया गया है। इसमें सुनवाई तेज होती है और फ़ैसले भी जल्दी किए जाते हैं। भारत में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अनुसार कुल अठारह (18) ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court)

फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court) में केस की सुनवाई तेज़ी से होती है। यह सेशन कोर्ट की तरह ही होती है। इसकी स्थापना सन 2000 में की गई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court) का मुख्य उदेश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा का निपटारा जल्दी से जल्दी करना है।

लोक अदालत (Public Court)

लोक अदालत (Public Court) एक बहुत ही मह्त्वपूर्ण कोर्ट है। इसमें मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामले, वैवाहिक और पारिवारिक मामले, भूमि अधिग्रहण के विवाद और विभाजन के दावे जैसे मामले का निपटारा समझौते के आधार पर होता है। इसमें अच्छी बात ये है, की इसमें वकील की भी जरुरत नहीं होती। जिससे आम लोगो का पैसा ओर टाइम दोनों बच जाता है ओर समझौते के आधार पर फैसला भी जल्दी हो जाता है।

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उम्मीद करता हूं। आपको Types of Court in India? – भारत में न्यायालयों के प्रकार? समझ में आ गया होगा। मैंने इसको सिंपल शब्दों में समझाने की कोशिश की है, अगर फिर भी कोई Confusion रह गई है, तो आप कमेंट बॉक्स में क्वेश्चन कर सकते है। मुझे आंसर देने में अच्छा लगेगा।

FAQs: (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

उत्तर:- भारत में छह (6) प्रकार के न्यायालय  (कोर्ट) स्थापित किए गए हैं जो निम्नलिखित  है –

  1. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
  2. उच्च न्यायालय (High Court)
  3. जिला और अधीनस्थ न्यायालय
  4. ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय
  5. फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast track court)
  6. लोक अदालत (Public Court)

उत्तर:- सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना अट्ठाईस जनवरी उन्नीस सौ पच्चास (28 -01 -1950) को हुई थी।

उत्तर:- भारत में कुल पच्चीस (25) उच्च न्यायालय (High Court) हैं।

उत्तर:- भारत में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अनुसार कुल अठारह (18) ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय है।

ट्रिब्यूनल (Tribunal) न्यायालय की लिस्ट –

बिजली के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity)

  • सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (Armed Forces Tribunal)
  • केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (Central Electricity Regulatory Commission)
  • केंद्रीय प्रशासनिक आयोग (Central administrative commission)
  • कंपनी लॉ बोर्ड (Company law board)
  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India)
  • प्रतियोगिता अपीलीय ट्रिब्यूनल (Competition Appellate Tribunal)
  • कॉपीराईट बोर्ड (Copyright Board)
  • सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (Customs, Excise and Service Appellate Tribunal)
  • साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण (Cyber Appellate Tribunal)
  • कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय न्यायाधिकरण (Employees Provident Fund Appellate Tribunal)
  • आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (Income Tax Appellate Tribunal)
  • बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Insurance regulator and development authority)
  • बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) (Intellectual Property Appellate Board)
  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (National Green Tribunal)
  • भारत का प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and exchange board of india)
  • दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (Telecom Disputes Settlement and Appellate Tribunal)
  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecommunication regulatory authority)
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मैंने “Types of Court in India? – भारत में न्यायालयों के प्रकार?” के बारे में बताया है। अगर आपकी कोई भी क्वेरी या वेबसाइट पर अपलोड हुए जजमेंट को PDF में चाहते है, तो आप हमसे ईमेल के दुबारा संपर्क कर सकते है। आपको Contact पेज पर Email ID ओर Contact फॉर्म मिलेगा आप कांटेक्ट फॉर्म भी Fill करके हमसे बात कर सकते है।

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5 thoughts on “Types of Court in India? | भारत में न्यायालयों के प्रकार? | कोर्ट कितने प्रकार के होते है?”

  1. Namaskar Sir, bhumi adhigrahan ka mamla yadi civil court me ho to pratiwadi lok Adalat me yah mamala utha sakata hain aur is mamale ko rokane ke liye kya kya karna hota hain?

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