भारतीय न्याय संहिता 111 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 111 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 111 in Hindi – BNS 111 in Hindi

आतंकवादी कार्य का अपराध- (1) यह कहा जाएगा कि किसी व्यक्ति ने आतंकवादी कार्य किया है, यदि वह भारत में या विदेश में भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को धमकी देने, जनसाधारण या उसके किसी हिस्से को अभित्रास करने या लोक व्यवस्था को विशुब्ध करने के आशय से निम्नलिखित कोई कार्य करके कोई कार्य कारित करता है-

  • (i) बमो, डायनामाइटों या किसी अन्य विस्फोटक पदार्थों या ज्वलनशील सामग्रियों या अग्नायुद्धों या अन्य लीथल हथियारों या विषों या अपायकर गैसों या अन्य रसायनों या कोई अन्य परिसंकटमय प्रकृति के पदार्थों (चाहे जैविक हो या अन्यथा) का ऐसी रीति में प्रयोग करना, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर शारीरिक हानि अथवा किसी व्यक्ति के जीवन को खतरे का वातावरण सृजित हो या उनमें भय की सूचना का प्रसारण हो;
  • (ii) किसी संपत्ति की क्षति या विनाश के कारण क्षति या हानि, समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक किन्हीं आपूर्तियों या सेवाओं का विनाश, सरकारी या लोक सुविधा, लोकस्थान या निजी संपति का विनाश, कारित करना;
  • (iii) गहन अवसंरचना के नुकसान या विनाश के साथ अत्यधिक हस्तक्षेप कारित करना;
  • (iv) सरकार या उसके संगठनों के ऐसी रीति में अभित्रास द्वारा, जिससे किसी लोक कृत्यकारी या अन्य व्यक्ति की मृत्यु या क्षति कारित हो या कारित होना संभाव्य हो, प्रकोपन या असर या सरकार को कोई कार्य करने के लिए बाध्य करने या कोई कार्य करने से विरत रहने अथवा देश की राजनैतिक, आर्थिक या सामाजिक अवसंरचना को अस्थिर या नष्ट करने अथवा लोक आपात सृजित करने या लोक सुरक्षा को जर्जर करने, जर्जर करने के क्रम में किसी व्यक्ति को निरुद्ध करना और ऐसे व्यक्ति के वध या अपहानि की धमकी देना;
  • (v) विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध किन्हीं अभिसमयों के क्षेत्र में सम्मिलित हो।

(2) जो कोई आतंकवादी कार्य कारित करेगा या कारित करने का प्रयास करेगा.-

  • (i) यदि ऐसे अपराध के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित होगा और और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो दस लाख रुपए से कम नहीं होगा,
  • (ii) अन्य मामलों में, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगा किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा।

(3) जो कोई आतंकवादी कार्य करने के लिए किसी संगठन, संगम या व्यक्तियों के समूहों के साथ षडयंत्र करता है या उसका संचालन करता है, या उसका संचालना करवाता है या किसी आतंकवादी कार्य की तैयारी में सहायता करता है, सुकर बनाता है या अन्यथा षडयंत्र में नियोजित होता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगा किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा।

(4) कोई व्यक्ति जो आतंकवादी संगठन का सदस्य है, जो आतंकवादी कार्य में अतवलित है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगा किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा।

See also  भारतीय न्याय संहिता 78 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 78 in Hindi & English

(5) जो कोई किसी व्यक्ति को जिसने किसी आतंकवादी कार्य का अपराध कारित किया है, साशय संशय देगा या छिपाएगा या संशय देने या छिपाने का प्रयास करेगा, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगी, किंतु आजीवन कारावास तक हो सकेगी और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो पांच लाख रुपए से कम नहीं होगा;
परंतु यह धारा ऐसे मामलों में लागू नहीं होगी, जिसमें संशय देने या छिपाने का कार्य अपराधी के पती या पत्नी के द्वारा किया गया है।

(6) जो कोई किसी आतंकवादी कार्य के किए जाने से व्यत्पुन्न या अभिप्राप्त किसी संपत्ति या आतंकवाद के आगमों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी रूप से धारित करता है या आतंकवादी निधि के माध्यम से अर्जित करता है या किसी आपराधिक कार्य किए जाने या उसको सुकर बनाने के लिए पूर्णतः या भागतः किन्हीं साधनों द्वारा प्रयुक्त किए जाने के लिए संपत्ति या निधियों को धारण करता है, प्रदान करता है, एकत्रित करता है या प्रयुक्त करता है या संपत्ति, निधियों या वित्तीय सेवाओं या अन्य संबंधित सेवाएं उपलब्ध करवाता है, वह ऐसी अवधि के कारावास से दंडनीय होगा, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा किंतु दस वर्ष तक हो सकेगा और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो एक लाख रुपए से कम नहीं होगा और ऐसी संपत्ति जब्ती और संपहण के लिए भी दायी होगी।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए.-

(क) “आतंकवादी” से ऐसा व्यक्ति निर्दिष्ट है जो-

  • (i) हथियारों, विस्फोटकों का विकास, विनिर्माण करता है, कब्जा रखता है, अर्जन, परिवहन, आपूर्ति या प्रयोग करता है या परमाणु विकिरणधर्मी या अन्य खतरनाक पदार्थ निर्मुक्त करता है या अग्नि, बाढ़, विस्फोट कारित करता है;
  • (ii) किसी माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से अप्रत्यक्ष रूप से कोई आतंकवादी कार्य कारित करता है या कारित करने का प्रयास अथवा षडयंत्र करता हैं;
  • (iii) आतंकवादी कार्य में मुख्य अपराधी या सह-अपराधी के रूप में भाग लेता है;

(ख) “आतंकवाद के आगमों” पद का वही अर्थ होगा जो उसका विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 की धारा 2 के खंड (छ) में है,

(ग) “आतंकवादी संगठन, संगम या व्यक्तियों का समूह” किसी आतंकवादी या आतंकवादी समूह के स्वामित्वाधीन या के द्वारा नियंत्रित कोई इकाई निर्दिष्ट है जो-

  • (i) किन्हीं साधनों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवादी कार्य कारित करती है या कारित करने का प्रयास करती है,
  • (ii) आतंकवादी कार्यों में भाग लेती है,
  • (iii) आतंकवाद के लिए तैयारी करती है,
  • (iv) आतंकवाद की अभिवृद्धि करती है,
  • (v) आतंकवाद का संचालन करती है और कारित करने के लिए अन्यों को निदेश देती है,
  • (vi) आतंकवादी कार्य को अग्रसर करने के सामान्य उद्देश्य के साथ कार्य कर रहे व्यक्तियों के समूहों द्वारा आतंकवादी कार्य करने में सहयोग करती है, जहां सहयोग आशयपूर्वक किया जाता है और आतंकवादी कार्य को अग्रसर करने के उद्देश्य से या समूह के आतंकवादी कार्य कारित करने के आशय के ज्ञान के साथ किया जाता है,
  • (vii) अन्यथा आतंकवाद के कार्य में अंतवलित है; या
  • (viii) विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 की पहली अनुसूची में सूचीबद्ध कोई संगठन हो या इस प्रकार सूचीबद्ध कोई संगठन के नाम के समान नाम से प्रचालित कोई संगठन।
See also  भारतीय न्याय संहिता 105 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 105 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 111 in English – BNS 111 in English

Offence if terrorist act- (1) A person is said to have committed a terrorist act if he commits any act in India or in any foreign country with the intention to threaten the unity, integrity and security of India, to intimidate the general public or a segment thereof, or to disturb public order by doing an act,-

  • (i) using bombs, dynamite or any other explosive substance or inflammable material or firearms or other lethal weapons or poison or noxious gases or other chemicals or any other substance (whether biological or otherwise) hazardous in nature in such a manner so as to create an atmosphere or spread a message of fear, to cause death or serious bodily harm to any person, or endangers a person’s life;
  • (ii) to cause damage or loss due to damage or destruction of property or disruption of any supplies or services essential to the life of the community, destruction of a Government or public facility, public place or private property;
  • (iii) to cause extensive interference with, damage or destruction to critical infrastructure;
  • (iv) to provoke or influence by intimidation the Government or its organisation, in such a manner so as to cause or likely to cause death or injury to any public functionary or any person or an act of detaining any person and threatening to kill or injure such person in order to compel the Government to do or abstain from doing any act, or destabilise or destroy the political, economic, or social structures of the country,or create a public emergency or undermine public safety;
  • (v) included within the scope of any of the Treaties listed in the Second Schedule to the Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967.

(2) Whoever, attempts to commit or commits an offence of terrorist act shall,-

  • (i) if such offence has resulted in the death of any person, be punishable with death or imprisonment for life without the benefit of parole, and shall also be liable to fine which shall not be less than rupees ten lakhs;
  • (ii) in any other case, be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than five years but which may extend to imprisonment for life, and shall also beliable to fine which shall not be less than rupees five lakhs.

(3) Whoever, conspires, organises or causes to be organised any organisation, association or a group of persons for terrorist acts, or assists, facilitates or otherwise conspires to engage in any act preparatory to any terrorist act, shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than five years but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine which shall not be less than rupees five lakhs.

(4) Any person, who is a member of terrorist organisation, which is involved in terrorist act, shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine which shall not be less than rupees five lakhs.

See also  भारतीय न्याय संहिता 71 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 71 in Hindi & English

(5) Whoever, intentionally harbours or conceals or attempts to harbour or conceal any person who has committed an offence of any terrorist act shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than three years but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine which shall not be less than rupees five lakh: Provided that this sub-section shall not apply to any case in which the harbour or concealment is by the spouse of the offender.

(6) Whoever, holds any property directly or indirectly, derived or obtained from commission of terrorist act or proceeds of terrorism, or acquired through the terrorist fund, or possesses, provides, collects or uses property or funds or makes available property, funds or financial service or other related services, by any means, to be used, in full or in part to carry out or facilitate the commission of any terrorist act, shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to imprisonment for life and shall also be liable to fine which shall not be less than rupees five lakhs and such property shall also be liable for attachment and forfeiture.

Explanation- For the purposes of this section,-

(a) “terrorist” refers to any person who-

(i) develops, manufactures, possesses, acquires, transports, supplies or uses weapons, explosives, or releases nuclear, radio logical or other dangerous substance, or cause fire, floods or explosions;

(ii) commits, or attempts, or conspires to commit terrorist acts by any means, directly or indirectly;

(iii) participates, as a principal or as an accomplice, in terrorist acts;

(b) the expression “proceeds of terrorism” shall have the same meaning as assigned to it in clause (g) of section 2 of the Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967;

(c) “terrorist organisation, association or a group of persons” refers to any entity owned or controlled by any terrorist or group of terrorists that-

  • (i) commits, or attempts to commit, terrorist acts by any means, directly or indirectly;-
  • (ii) participates in acts of terrorism;-
  • (iii) prepares for terrorism;-
  • (iv) promotes terrorism;-
  • (v) organises or directs others to commit terrorism;-
  • (vi) contributes to the commission of terrorist acts by a group of persons acting with common purpose of furthering the terrorist act where the contribution is made intentionally and with the aim of furthering the terrorist act or with the knowledge of the intention of the group to commit a terrorist act; or
  • (vii) is otherwise involved in terrorism; or
  • (viii) any organisation listed in the First Schedule to the Unlawful Activities(Prevention) Act, 1967 or an organisation operating under the same name as an organisation so listed.
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