भारतीय न्याय संहिता 29 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 29 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 29 in Hindi – BNS 29 in Hindi

ऐसे कार्यों का अपवर्जन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है- धारा 21, 22 और 23 के अपवादों का विस्तार उन कार्यों पर नहीं है जो उस अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है जो उस व्यक्ति को, जो सम्मति देता है या जिसकी और से सम्मति दी जाती है, उन कार्यों से कारित हो, या कारित किए जाने का आशय हो, या कारित होने की संभाव्यता ज्ञात हो।

दृष्टांत- गर्भपात कराना (जब तक कि वह उस स्त्री का जीवन बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक कारित न किया गया हो) किसी अपहानि के बिना भी, जो उसने उस स्त्री को कारित हो या कारित करने का आशय हो, स्वतः अपराध है। इसलिए वह “ऐसी अपहानि के कारण” अपराध नहीं है, और ऐसा गर्भपात कराने की उस स्त्री की या उसके संरक्षक की सम्मति उस कार्य को न्यायानुमत नहीं बनाती।

Bharatiya Nyaya Sanhita 29 in English – BNS 29 in English

Exclusion of acts which are offences independently of harm caused- The exceptions in sections 21, 22 and 23 do not extend to acts which are offences independently of any harm which they may cause, or be intended to cause, or be known to be likely to cause, to the person giving the consent, or on whose behalf the consent is given.

Illustration- Causing miscarriage (unless caused in good faith for the purpose of saving the life of the woman) is offence independently of any harm which it may cause or be intended to cause to the woman. Therefore, it is not an offence “by reason of such harm”; and the consent of the woman or of her guardian to the causing of such miscarriage does not justify the act.

See also  भारतीय न्याय संहिता 38 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 38 in Hindi & English
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