भारतीय न्याय संहिता 57 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 57 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 57 in Hindi – BNS 57 in Hindi

लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण- जो कोई लोक साधारण द्वारा, या दस से अधिक व्यक्तियों की किसी भी संख्या या वर्ग द्वारा किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत- क, एक लोक स्थान में एक प्लेकार्ड चिपकाता है, जिसमें एक पंथ को जिसमें दस से अधिक सदस्य है, एक विरोधी पंथ के सदस्यों पर, जब कि वे जुलूस निकालने में लगे हुए हो, आक्रमण करने के प्रयोजन से, किसी निश्चित समय और स्थान पर मिलने के लिए उकसाया गया है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

Bharatiya Nyaya Sanhita 57 in English – BNS 57 in English

Abetting commission of offence by public or by more than ten persons- Whoever abets the commission of an offence by the public generally or by any number or class of persons exceeding ten, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years and with fine.

Illustration- A affixes in a public place a placard instigating a sect consisting of more than ten members to meet at a certain time and place, for the purpose of attacking the members of an adverse sect, while engaged in a procession. A has committed the offence defined in this section.

See also  भारतीय न्याय संहिता 28 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 28 in Hindi & English
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