भारतीय न्याय संहिता 56 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 56 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 56 in Hindi – BNS 56 in Hindi

कारावास सें दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण- (1) जो कोई कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध इस संहिता में नहीं किया गया है, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि के एक चौथाई भाग तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

(2) यदि दुष्प्रेरक या दुष्प्रेरित व्यक्ति ऐसा लोक सेवक हो, जिसका कर्तव्य ऐसे अपराध के लिए किए जाने को निवारित करना हो, तो वह दुष्प्रेरक उस अपराध के लिए उपबंधित किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित दीर्घतम अवधि के आधे भाग तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो अपराध के लिए उपबंधित है, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

दृष्टांत-

  • (क) मिथ्या साक्ष्य देने के लिए ख को क उकसाता है। यहां, यदि ख मिथ्या साक्ष्य न दे, तो भी क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है, और वह तद्नुसार दण्डनीय है।
  • (ख) क, एक पुलिस आफिसर, जिसका कर्तव्य लूट को निवारित करना है, लूट किए जाने का दुष्प्रेरण करता है। यहां यद्यपि वह लूट नहीं की जाती, क उस अपराध के लिए उपबन्धित कारावास की दीर्घतम अवधि के आधे से, और जुर्माने से भी दण्डनीय है।
  • (ग) क द्वारा, जो एक पुलिस आफिसर है, और जिसका कर्तव्य लूट को निवारित करना है, उस अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण ख करता है, यहां यद्यपि वह लूट न की जाए, ख लूट के अपराध के लिए उपबन्धित कारावास की दीर्घतम अवधि के आधे से, और जुर्माने से भी दण्डनीय है।
See also  भारतीय न्याय संहिता 6 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 6 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 56 in English – BNS 56 in English

Abetment of offence punishable with imprisonment- (1)Whoever abets an offence punishable with imprisonment shall, if that offence be not committed in consequence of the abetment, and no express provision is made by this Sanhita for the punishment of such abetment, be punished with imprisonment of any description provided for that offence for a term which may extend to one-fourth part of the longest term provided for that offence; or with such fine as is provided for that offence, or with both.

(2) If the abettor or the person abetted is a public servant, whose duty it is to prevent the commission of such offence, the abettor shall be punished with imprisonment of any description provided for that offence, for a term which may extend to one-half of the longest term provided for that offence, or with such fine as is provided for the offence, or with both.

Illustration-

  • (a) A instigates B to give false evidence. Here, if B does not give false evidence, A has nevertheless committed the offence defined in this section, and is punishable accordingly.
  • (b) A, a police-officer, whose duty it is to prevent robbery, abets the commission of robbery. Here, though the robbery be not committed, A is liable to one-half of the longest term of imprisonment provided for that offence, and also to fine.
  • (c) B abets the commission of a robbery by A, a police-officer, whose duty it is to prevent that offence. Here, though the robbery be not committed, B is liable to one-half of the longest term of imprisonment provided for the offence of robbery, and also to fine.
See also  भारतीय न्याय संहिता 27 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 27 in Hindi & English
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