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Home Judgements

State of UP vs Ompal Singh 498a Judgement

Ashutosh Chauhan by Ashutosh Chauhan
November 28, 2022
in Judgements, 498a Judgement
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498a judgement
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पुलिस थाना सिहानीगेट जिला गाजियाबाद द्वारा प्रेषित आरोपपत्र मु०अ०सं० ३८८/१९९५ अन्तर्गत धारा- ४९८ए, ५०४ भा०द०सं० व धारा ३/४ दहेज प्रतिषेध अधि० के आधार पर अभियुक्तमण ओमपाल सिंह, संतोष व श्रीमती मीरा देवी का विचारण इस न्यायालय द्वारा किया गया।

संक्षेप में मामले के तथ्य इस प्रकार है कि वादिया मुकदमा पूजा कुमारी द्वारा एक टाईपशुदा प्रार्थना-पत्र एस.पी.सिटी गाजियाबाद को इस आशय का प्रस्तुत किया गया कि उसके पिता श्री जयराम सिंह तौमर जो सिटी बोर्ड गाजियाबाद में नगर अभियंता के पद पर कार्यरत थे, का देहान्त लगभग छः वर्ष पूर्व हो गया। प्रार्थिया की शादी ओम पाल सिंह पुत्र श्री सौदान सिंह निवासी ग्राम रामपुर थाना जवाँ जिला अलीगढ़ के साथ दिनांक २४.०४.१९९३ को सम्पन्न हुई थी जिसमें उसकी विधवा मां ने करीब दो लाख रूपये खर्च किये थे। शादी के लगभग पन्द्रह दिन बाद ही ओमपाल प्रार्थिया को लेकर उसकी मां के निवास स्थान गांधीनगर आये तभी प्रार्थिया व उसकी मां से और दहेज की मांग की व अभद्रता से पेश आये। प्रार्थिया जैसे तैसे कुछ समय तक अपनी ससुराल में रह पायी किन्तु प्रार्थिथा का पति, सास दमयन्ती, ननद मीरा, जेठ संतोष और ससुर सौदान सिंह बावा प्रार्थिया से दहेज की मांग करते रहे तथा प्रार्थिया के साथ अभद्र व्यवहार करते रहे। लगभग छः माह पूर्व प्रार्थिया के पति, सास, ससुर, जेठ व ननद प्रार्थिया को लेकर उसकी माता के मकान गांधीनगर, गाजियाबाद पर आये और प्रार्थिया की मां तथा प्रार्थिया पर दबाब डाला कि किसी भी तरह एक मकान गाजियाबाद में नाम करा दें। प्रार्थिया व उसकी माता द्वारा असमर्थता जताने पर सभी लोगों ने प्रार्थिया व उसकी माता के साथ गालीगलौच की तथा प्रार्थिथा को धमकी देकर छोड़ कर चले गये कि जब तक एक मकान ओमपाल के नाम गाजियाबाद में नहीं कराया जाता तब तक वे प्रार्थिया को नहीं ले जायेंगे। प्रार्थिया की माँ ने सभी रिश्तेदार व अन्य हितेषियों के माध्यम से प्रार्थिया की ससुराल वालों को काफी समझाने का प्रयास किया किन्तु ये लोग बारबार आ कर धमकी दे रहे हैं जल्द से जल्द ओमपाल के नाम मकान नहीं दिलाया तो वह दूसरी शादी कर लेंगे। प्रार्थिया एक अनाथ लड़की है और उसके चार छोटे भाई, बहन हैं। उन सब को पढ़ाने लिखाने की जिम्मेदारी विधवा माँ पर है। प्रार्थिया की माँ उनकी नाजायज मांग पूरी करने में असमर्थ है। प्रार्थना की गयी कि उपरोक्त व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा कायम करके उचित कार्यवाही की जाय।

उक्त प्रार्थना-पत्र पर एस.पी.सिटी द्वारा पारित आदेश दिनांकित २१.०५.१९९५ के अनुक्रम में थाना हाजा पर अभियुक्तणण ओमपाल सिंह, सौदान सिंह, संतोष, श्रीमती दमयन्ती व श्रीमती मीरा देवी के विरूद्ध अन्तर्गत धारा ४९८ए, ५०४ भा०द०सं० व धारा ३/४ दहेज प्रतिषेध अधि० के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित की गयी व मामले में विवेचना करायी गयी।

विवेचक ने दौरान विवेचना घटना का निरीक्षण कर नक्शा नजरी बयान व गवाहान के बयान अन्तर्गत धारा १६१ दण्ड प्रक्रिया संहिता अंकित किये गये तथा सम्पूर्ण विवेचना उपरान्त विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य पाते हुए अभियुक्तमण ओमपाल सिंह, सौदान सिंह, संतोष, श्रीमती दमयन्ती व श्रीमती मीरा देवी के विरूद्ध अन्तर्गत धारा ४९८ए,५०४ भा०द०सं० व धारा ३/४ दहेज प्रतिषेध अधि० के तहत आरोप पत्र विचारण हेतु न्यायालय में प्रेषित किया गया।

अभियुक्तगण को विचारण हेतु आहुत किया गया। अभियुक्तगण को धारा २०७ दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत अभियोजन प्रपत्रो की प्रतियां प्रदान की गयी। अभियुक्तगण के विरूद्ध आरोप अन्तर्गत धारा ४९८ए,५०४ भा०द०सं० व धारा ३/४ दहेज प्रतिषेध अधि० में विरचित किया गया। अभियुक्तगण ने आरोप से इंकार किया व परीक्षण की याचना की।

दौरान विचारण अभियुक्तगण श्रीमती दमयन्ती व सौदान सिंह की मृत्यु होने के कारण उनके विरूद्ध वाद की कार्यवाही उपशमित की गई। इस प्रकार प्रस्तुत प्रकरण में केवल अभियुक्तमण ओमपाल सिंह, संतोष व श्रीमती मीरा देवी का विचारण किया जा रहा है।

अभियोजन पक्ष की ओर से अभिलेखीय साक्ष्य के रूप में तहरीर प्रथम सूचना रिपोर्ट, नकल चिक प्रथम सूचना रिपोर्ट, नकल जी.डी. एवं आरोपपत्र प्रस्तुत किये गये। मौखिक साक्ष्य के रूप में पी०डब्लू-१ श्रीमती मंजू तौमर एवं पी.डब्लू.-२ कल्याण सिंह को परीक्षित कराया गया हैं। वादिया मुकदमा पूजा व साक्षी श्री शिव सिसोदिया की मृत्यु हो जाने के कारण उन्हें साक्ष्य में प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

अभियोजन साक्ष्य पूर्ण होने के उपरान्त अभियुक्तगण के बयान मुल्जिम अन्तर्गत धारा ३१३ दण्ड प्रक्रिया संहिता अंकित किये गये। जिसमें अभियुक्तमण ने अभियोजन कथानक को गलत बताया तथा अभियुक्त संतोष ने कथन किया कि वह अलग रहता था

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