भारतीय न्याय संहिता 38 क्या है? – Bharatiya Nyaya Sanhita 38 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 38 in Hindi – BNS 38 in Hindi

शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है- शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्ववर्ती अंतिम धारा 37 में वर्णित निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एत्स्मिन्पश्चात् प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है. अर्थात्-

  • (क) ऐसा हमला, जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मृत्यु होगा;
  • (ख) ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा;
  • (ग) बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला;
  • (घ) प्रकृति विरुद्ध काम तृष्णा की तृप्ति के आशय से किया गया हमला;
  • (ङ) व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला;
  • (च) इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा।
  • (छ) अम्ल फेंकने या देने का कृत्य या अम्ल फेंकने या देने का प्रयास करना जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि ऐसे कृत्य के परिणामस्वरूप अन्यथा घोर उपहति कारित होगी।
See also  भारतीय न्याय संहिता 106 क्या है? - Bharatiya Nyaya Sanhita 106 in Hindi & English

Bharatiya Nyaya Sanhita 38 in English – BNS 38 in English

When the right of private defence of body extends to causing death- The right of private defence of the body extends, under the restrictions specified in section 37, to the voluntary causing of death or of any other harm to the assailant, if the offence which occasions the exercise of the right be of any of the descriptions hereinafter enumerated, namely-

  • (a) such an assault as may reasonably cause the apprehension that death will otherwise be the consequence of such assault;
  • (b) such an assault as may reasonably cause the apprehension that grievous hurt will otherwise be the consequence of such assault;
  • (c) an assault with the intention of committing rape;
  • (d) an assault with the intention of gratifying unnatural lust;
  • (e) an assault with the intention of kidnapping or abducting; Right of private defence against act of a person with mental illness, etc. Acts against which there is no right of private defence. When the right of private defence of body extends to causing death.
  • (f) an assault with the intention of wrongfully confining a person, under circumstances which may reasonably cause him to apprehend that he will be unable to have recourse to the public authorities for his release;
  • (g) an act of throwing or administering acid or an attempt to throw or administer acid which may reasonably cause the apprehension that grievous hurt will otherwise be the consequence of such act.
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