Niharika vs Neeraj 406 ipc Judgement

परिवादिनी निहारिका डोगरा द्वारा प्रस्तुत परिवाद अभियुक्त नीरज शर्मा को तलब कर दण्डित करने हेतु योजित किया गया।

संक्षेप में परिवादिनी कथन इस प्रकार है कि परिवादिनी निहारिका डोगरा द्वारा इन कथनो के साथ प्रस्तुत किया गया कि उसकी शादी दिनांक २२.११.२००९ को हिन्दू रीति रिवाजो के अनुसार अभियुक्त नीरज शर्मा के साथ सम्पन्न हुयी थी। शादी में उसके पिता ने अपनी सामर्थ्य व हैसियत के अनुसार करीब ४ लाख रूपये खर्चा किया था। विवाह के उपरान्त परिवादिनी अपनी ससुराल अपने पति के निवास स्थान पर जाकर रही थी और परिवादिनी अपने साथ अपना स्त्रीधन, जिसमे नीरज शर्मा पति, विजय कुमार शर्मा व्यास देव शर्मा ससुर, श्रीमती सुनीता सास, दीपक शर्मा जेठ, पंकज शर्मा देवर को दिया था। इसके अलावा धर्मवीर शर्मा फूफा व नीलम शर्मा फूफस को भी काफी सामान दिया था, जिसकी सूची साथ में संलग्न है। परिवादिनी द्वारा विवाह के उपरान्त अपने समस्त कर्तव्यों का निर्वाह किया गया था, जिससे सास ससुर की सेवा करना पति, देवर आदि के कपडे धोना, खाना बनाना, घर की सफाई करना आदि, कभी ससुराल वालो को शिकायत का मौका नहीं दिया। लेकिन ससुराल वाले लालची किस्म के इंसान थे और विपक्षीगण दिए गए सामान/दहेज से खुश नहीं थे और आये दिन कम दहेज का ताना देकर तंग व परेशान करते व मारपीट करते। परिवादिनी से एक मोटरसाइकिल व २ लाख रूपये नकद लाने की मांग करते थे जिसको पूरा करने मे असमर्थता जतायी, लेकिन ससुराल वाले अपनी बात पर अडा रहे और दहेज की मांग पूरी न होने पर दिनांक २३.१०.२०१० को उपरोक्त सभी लोगो ने मारपीट कर पहने हुए मात्र एक जोडी कपडो मे घर से निकाल दिया और कहा कि जब तक तू मोटरसाइकिल व २ लाख रूपये नकद लेकर नही आते है तब तक हमारे घर नहीं आना। दिनांक २३.१०.२०१० से अपने पिता के घर अपने मायके वालो पर बोझकर बनकर रह रही है। परिवादिनी जो आज तक उसके ससुराल वालो ने कोई अता पता नही लिया है। परिवादिनी को प्रतिदिन अपने स्त्रीधन की आवश्यकता पडती रहती ह । परिवादिनी ने बार बार अपने स्त्रीधन की मांग की परन्तु आज तक कोई स्त्रीधन वापस नही किया गया है बल्कि उल्टे परिवादिनी को जान से मारने की धमकी दी है और स्त्रीधन देने से दिनांक ०४.०२.२०११ को इन्कार किया है। प्रार्थना है कि विपक्षीगण को धारा-४०६ भा०दं०सं० के अन्तर्गत तलब कर दण्डित किया जाए।

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परिवादिनी तथा उसकी तरफ से प्रस्तुत मौखिक व प्रलेखीय साक्ष्य के आधार पर मेरे विद्वान पूर्वाधिकारी द्वारा दिनांक १७.११.२०११ के आदेशानुसार अभियुक्त नीरज शर्मा को धारा-४०६ भा०दं०सं० के तहत विचारण हेतु तलब किए जाने हेतु आदेश पारित किया गया।

अभियुक्त न्यायालय में हाजिर आया। उसने अपनी जमानत करायी।

परिवादिनी की ओर से धारा-२४४ दं०प्र०सं० के तहत पी०डब्लू०-१ निहारिका डोगरा को परीक्षित कराया गया है।

परिवादिनी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त नीरज शर्मा के विरूद्ध धारा-४०६ भा०दं०सं० के आरोप विरचित किये गये। अभियुक्त ने आरोप से इंकार किया और परीक्षण चाहा।

धारा-२४६ दं०प्र०सं० मे पी०डब्लू०-१ निहारिका डोगरा को परीक्षित कराया गया है। परिवादिनी की ओर से फेहरिस्त सबूत दि०-२५.०८.२०११ के माध्यम से विवाह में दिये गये सामान की सूची की छायाप्रति प्रस्तुत की गई है, परंतु जो छायाप्रति मात्र होने के कारण साक्ष्य में ग्राह्म नहीं है। अन्य कोई साक्ष्य पत्रावली पर परिवादिनी की ओर से दाखिल नहीं किया गया है।

संक्षेप में परिवाद के पक्ष में प्रस्तुत साक्षी का साक्ष्य निम्नवत्‌ है-

पी०डब्लू०-१ निहारिका डोगरा स्वयं परिवादिनी ने धारा-२४४ दं०प्र०सं० के तहत मुख्यपृच्छा दि० २६.०७.२०१३ को बयान दिया कि, “‘मेरा विवाह विपक्षी के साथ २२ नवम्बर २००९ को हुआ था। मेरे परिवार वालो ने लगभग ४ लाख रूपये खर्च कर गृहस्थी का सामान दिया था। विवाह के उपरान्त मैं अपनी ससुराल में जाकर रही। ससुराल में जाकर मैंने अपने सभी कर्तव्यों का निर्वाह किया था। जिसमे सास ससुर की सेवा करना तथा घर का समस्त कार्य करना। मैंने कभी भी किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया। मेरी ससुराल वाले दहेज के लोभी थे, जो मुझे मेरे माता पिता द्वारा सामान दिया गया था, उससे वह खुश नहीं थे। मेरी ससुरालवाले मोटरसाइकिल, गाडी व दो लाख रूपये की मांग करते थे। मुझे जून २०१० को मेरी ससुराल वालो ने मारपीट कर निकाल दिया था। जब से मैं अपने पिता के पास रह रही हूँ। मुझे अपने सामान की आये दिन आवश्यकता पड़ती रहती है। मैंने जब उनसे सामान की मांग की तो सामान नहीं दिया और जान से मारने की धमकी दी। सामान की सूची मैंने परिवादपत्र के साथ दाखिल की है। जिसको वे आज तक अपने कब्जे मे लिए हुए है और ना ही उसे कोई स्त्रीधन दिया है। मेरे सामान को वह खुर्द बुर्द कर रहे है।”

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धारा-२४६ दं०प्र०सं० के अंतर्गत इस साक्षी ने पुनः मुख्यपृच्छा में दि०- ०८.०३.२०१६ को बयान दिया कि, “मेरा विवाह २२.११.२००९ को विपक्षी नीरज शर्मा के साथ हुआ था। मेरे परिवार वालो ने लगभग चार लाख रूपये जिसमे गृहस्थी का सारा सामान दिया था जिसकी सूची मैंने न्यायालय में दाखिल की है। मैंने ससुराल में जाकर अपने पत्नी धर्म का निर्वाह किया। अपने सास ससुर पति आदि की सेवा की थी तथा घर का समस्त कार्य करती थी। लेकिन मेरी ससुरालवाले दहेज के लोभी थे। दहेज में दो लाख रूपये व मोटरसाइकिल लाने की मांग करते थे। कम दहेज लाने का ताना उलाहना करते थे तथा मेरे साथ मारपीट करते थे। मैंने उनकी मांग पूरी करने में असमर्थता जताई तो उन्होने मुझे मारपीट कर जून २०१० में घर से निकाल दिया। मात्र पहने हुए कपड़ों में निकाल दिया था।

पूरा जजमेंट पढ़ने के लिए निचे PDF को पढ़े।

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