State of UP vs Kuldeep 498a Judgement

वर्तमान मामला पुलिस रिपोर्ट के आधार पर संस्थित मामला है।

न्यायालय द्वारा थाना विजय नगर से अ० सं०-368/2005 धारा-498a , 323, 506, भारतीय दण्ड संहिता व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम, थाना विजय नगर, जिला गाजियाबाद में अभियुक्तगण कुलदीप सिंह, कुशलपाल सिंह, श्रीमती ऊषा व श्रीमती अनविता के विरूद्ध भेजे गये आरोप-पत्र के आधार पर विचारण किया गया ।

संक्षेप में अभियोजन कथानक इस प्रकार है। प्रथम सूचना दाता रणधीर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी मकान नं० 20 माता कालोनी सेक्टर 12 विजयनगर जिला गाजियाबाद के द्वारा अभियुकतगण के विरूद्ध यह कथन करते लिखित तहरीर दिनाँकित 04-09-2005 थाना विजय नगर में प्रस्तुत किया कि प्रथम सूचना दाता की पुत्री शालू का विवाह दिनाँक 17-11-2003 को होटल वेस्ट व्यू में अभियुक्त कुलदीप सिंह उपरोक्त के साथ हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ था । वर पक्ष की माँग के अनुसार एक लाख ग्यारह हजार रूपये ( रू० 1,11,000 ) नकद एक मारूति कार टी० वी० , फ्रिज , वॉशिंग मशीन , डबल बेड सोफा सेट , बरतन कपड़े आदि समस्त सामान दिया गया था । लड़के को सोने की चेन , घड़ी , लड़के की माँ को सोने के सेट , दादाजी , पिताजी , बहन व बहनोई को सोने की चेन व अन्य सामान दिया गया था । जिसकी सूची जब चाहेंगें दिखा दी जायेगी । इसके अलावा प्रथम सूचना दाता ने अपनी पुत्री को नकद पच्चीस हजार रूपये , दो सोने के सेट , चार कड़े , घड़ी , अँगूठियाँ , व अन्य कीमती सामान के रूप में लगभग पाँच लाख रूपये का सामान दिया था । शादी में कुल मिलाकर 15 लाख रूपये खर्च किये थे । इसके बाद प्रथम सूचना दाता की पुत्री के ससुराल जाने पर ससुराल वालों ने डरा धमका कर प्रथम सूचना दाता से 4 लाख रूपये नकद दहेज के रूप में दामाद उसके पिता , माँ , बहन ने ले लिये | उसके बाद भी दहेज की लालसा समाप्त नहीं हुयी और यह लोग शादी के बाद से ही दहेज के लिये मारपीट करने लगे । प्रथम सूचना दाता की पुत्री से उसका पति , सास , ननद ने कुलदीप की नौकरी के लिये पाँच लाख रूपये की माँग करने लगे । पैसा देने में असमर्थता दर्शाने पर अभियुक्‍तगण का व्यवहार खराब हो गया और प्रथम सूचना दाता की बेटी से रोज – रोज मारपीट करने लगे । दिनाँक 26-06-2005 को प्रथम सूचना दाता की बेटी शालू को उसके पति , सास , ससुर व ननद ने बुरी तरह से मारपीट करके घर से निकाल दिया कि पहले अपने घर से 5 लाख रूपया लाओ , तब इस घर में रह पाओगी । प्रथम सूचना दाता की लड़की पहने हुये कपड़ों में उसके घर आयी । उसके बाद कई बार प्रथम सूचना दाता संभ्रान्त व्यक्तियों को लेकर लड़की की ससुराल गया , और लड़की को रखने का निवेदन किया किन्तु वह लोग नहीं माने । अभियुकतगण प्रथम सूचना दाता की लड़की को जान से मार सकते हैं । निवेदन किया गया है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके कार्यवाही किया जाये ।

तहरीर प्रदर्श क के आधार पर थाना विजय नगर में अभियुकतगण कुलदीप सिंह , कुशलपाल सिंह , श्रीमती ऊषा , व श्रीमती अनविता उपरोक्त के विरूद्ध अ० सं० 368/2005 धारा 498a/ , 506 , भारतीय दण्ड संहिता व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम थाना विजय नगर जिला गाजियाबाद में प्रथम सूचना रिपोर्ट दिनाँक 04-09-2005 को समय 2:20 बजे चिक सं० 266/2005 पर दर्ज की गयी चिक प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रदर्श क 5 है, , सूचना के सार की प्रविष्टि 6.9. की रपट सं० 40 पर दिनाँक 04-09-2005 को समय 2:20 बजे की गयी । G.D. की रपट सं० 40 की कार्बन प्रति प्रदर्श क 6 है ।

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प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विवेचक उपनिरीक्षक जे० के ० गंगवार ने विवेचना आरंभ किया , प्रथम सूचना दाता रणधीर सिंह व गवाहान अमित पुत्र रणधीर सिंह , श्रीमती शालू पीड़िता, श्रीमती राजेश , का० क्लर्क C/C 1746 किरनपाल सिंह का बयान अंतर्गत धारा 161 दण्ड प्रक्रिया संहिता अभिलिखित किया । घटनास्थल का नक्शानजरी प्रदर्श क 3 तैयार किया । विवेचना के पश्चात अभियुकतगण कुलदीप सिंह , कुशलपाल सिंह , श्रीमती ऊषा , व श्रीमती अनविता के विरूद्ध धारा 498a , 506 , भारतीय दण्ड संहिता व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम थाना विजय नगर जिला गाजियाबाद में आरोपपत्र प्रदर्श क 4 न्यायालय में प्रेषित किया गया ।

न्यायालय द्वारा थाना विजय नगर से अ० सं० 368/2005 में अभियुक्तगण कुलदीप सिंह , कुशलपाल सिंह , श्रीमती ऊषा , व श्रीमती अनविता के विरूद्ध धारा 498a , 323 , 506 , भारतीय दण्ड संहिता व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम थाना विजय नगर जिला गाजियाबाद में प्राप्त आरोपपत्र के आधार पर मामले का संज्ञान अंतर्गत धारा 190 (1) (b)) दण्ड प्रक्रिया संहिता लिया गया ।

न्यायालय द्वारा अभियुक्तगण की उपस्थिति हेतु आदेशिकायें जारी किया गया अभियुक्‍तगण न्यायालय के समक्ष उपस्थित आये । अभियुक्तगण को धारा 207 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुपालन में अभियोजन प्रपत्रों की नकलें प्रदान की गयीं ।

न्यायालय द्वारा दिनाँक 23-08-2008 को अभियुक्‍तगण के विरूद्ध धारा 498a , 323 , 506 , भारतीय दण्ड संहिता व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में आरोप विरचित किया गया । अभियुकतगण ने आरोप से इंकार किया तथा विचारण चाहा ।

अभियोजन पक्ष का साक्ष्य आरंभ हुआ । अभियोजन पक्ष के द्वारा अपने मामले को साबित करने के लिये कुल 4 गवाह प्रथम सूचना दाता रणधीर सिंह एज PW1 , अमित एश PW2 , शालू  PW3 तथा PW4 विवेचक उपनिरीक्षक जे० के ० गंगवार को प्रस्तुत किया गया है तथा दस्तावेजी साक्ष्य में यायालय [अपर सिविल जज (सी०डि० ) में वाद संख्या 833/2005 कुलदीप बनाम शालू में पारित निर्णय की नकल प्रदर्श क2 दाखिल किया गया है । अभियोजन पक्ष का साक्ष्य समाप्त हुआ ।

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न्यायालय द्वारा दिनाँक 09-03-2015 को अभियुक्तगण का बयान अंतर्गत धारा 313 दण्ड प्रक्रिया संहिता दर्ज किया गया । अभियुक्तगण ने अपने बयान अंतर्गत धारा 313 दण्ड प्रक्रिया संहिता में शादी होने के तथ्य को स्वीकार किया है किन्तु दहेज माँगने , दहेज के लिये शालू को प्रताड़ित करने , और दहेज के लिये घर से निकालने की घटना से इंकार किया है । गवाहान के द्वारा रंजिशन झूँठा बयान दिया जाने का कथन किया है । विवेचक के बयान के संबंध में यह कथन किया है कि विवेचक ने गलत बयान दिया है मुकदमा रंजिशन चलने का कथन किया है । अभियुक्तगण ने अपनी प्रतिरक्षा में साक्ष्य पेश किये जाने का कथन किया..

पूरा जजमेंट पढ़ने के लिए निचे PDF को पढ़े।

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