State of UP vs Satpal 498a Judgement

अभियुक्तगण सतपाल, श्रीमती ब्रिजेश व सुशील के विरूद्ध थाना मुरादनगर जिला गाजियाबाद की पुलिस द्वारा अन्तर्गत धारा ४९८ए,३२३,५०४,५०६ भा०दं०सं० व ३/४ दहेज प्रतिषेद्ध अधिनियम के अन्तर्गत आरोप पत्र न्यायालय में विचारण हेतु प्रेषित किया गया है, जिसके आधार पर उपरोक्त अभियुक्तगण का विचारण इस न्यायालय द्वारा किया गया।

संक्षेप में अभियोजन कथानक इस प्रकार है कि, प्रार्थिनी शिखा ने थाना मुरादनगर पर इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया कि मेरी शादी दिनांक २१.०४.२००७ को स्वर्गीय विरेन्द्र सिंह मलिक के सुपुत्र सुशील मलिक निवासी गंगा विहार कालोनी मुरादनगर में हुई। मेरी शादी में मेरे माता पिता ने अपनी हैसियत से बढकर रूपये खर्च किए, जिसमें पांच लाख रूपये नकद, घरेलू सामान जैसे इलेक्ट्रानिक, फर्नीचर, कपडे, बर्तन, सोने चांदी के जेवरात, करीजमा बाइक कुल करीब १५ लाख रूपये खर्च हुए। शादी के पहले मेरे पति की सरकारी नौकरी बतायी गयी थी। शादी के बाद मुझे पता चला कि मेरा पति प्राइवेट कम्पनी में काम करता है। मैं अपने भाग्य में ऐसा ही समझ कर ससुराल में रह कर अपने पति, सास, दादसरे की सेवा करने लगी। शादी के कुछ दिन बाद ही यह लोग मुझे ताने देने लगे और कहने लगे कि अपने मायके से ५ लाख रूप्ये आकर दे, जिससे कि हम अपना कोई विजनेस कर सकें। मैंने अपने पति को समझाया कि मेरे पिता इतना दहेज नहीं दे सकतें तो उन्होंने मेरे साथ मारपीट की और दो दिनों तक भूखा रखा जब मेरे घरवालों को पता लगा तो वे कुछ लोगों को लेकर मेरे घर आये, उन्होंने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, कि हमारी लडकी को अच्छी तरह से रखे लेकिन मेरी सास ब्रिजेश, दादसरा सतपाल और मेरे पति ने उनकी बेइजती करके उन्हें भगा दिया। इसी बीच इनके अत्याचार सहकर इनकी सेवा करती रही। ७ नवम्बर २००९ को मुझे एक लडका पैदा हुआ। मोदीनगर में डाक्टर ने मेरे पति से कहा कि लडकी काफी कमजोर है, इसे खून चढवा दो तो मेरी सास और दादसरे ने यह कह कर मना कर दिया कि हमारे पास रूपये नहीं है और मुझे उसी हालत में वहां से ले आए। १५ दिन बाद ही ये लोग मुझसे काम करवाने लगे। २५ नवम्बर २००९ को मेरे मायके वालों ने जब छुछक लेकर आए तो इन लोगों ने उनकी काफी गाली गलौज से अपमान करा और मेरा बच्चा छिनकर मुझे धक्का देकर कहा कि अपनी लडकी अपने घर ले जाओ मैं रोती हुई अपने घर आ गयी। कुछ देर बाद जलालपुर के प्रधान, मेरी छोटी बहन के पति विजय आदि के माध्यम से पंचायत हुई, जिसमें इन लोगों ने मेरा लडका वापस कर दिया। २५ नवम्बर २००९ से २५ नवम्बर २०१० तक मैं अपने घर पर रही इस बीच कई बार पंचायते होती रहीं। मेरे पिता ने हर बार इनसे प्रार्थना की कि अच्छी तरह से मेरी लडकी को अपने घर ले जाये लेकिन इन लोगों ने हर बार उनका अपमान किया। ३१ जनवरी २०११ को दोनों तरफ से काफी रिस्तेदार इक्टठा हुए। मेरे पति सुशील व उनके चाचा विनोद ने मेरे मायके वालों को आश्वासन दिया कि शिखा व अपने बच्चे को अच्छी तरह से रखूंगा लेकिन शिखा के घर से उससे कोई मिलने नहीं आयेगा और न ही फोन करेगें इस फैसले पर मैं अपने ससुराल आ गयी। मायके वालों से कोई सम्पर्क न होने की वजह से ये लोग मुझे जानवरों की तरह पीटने लगे व नौकरानी की तरफ रखने लगे। ३ नवम्बर २०११ को मेरे पति व सास ने मिलकर मेरे साथ मारपीटायी की तब उसी दिन मैं १०० नम्बर पर फोन करके मदद मांगी लेकिन पुलिस ने कोई मदद नहीं की। मेरे पति, दादसरा सतपाल तथा लडके के चाचा विनोद आदि ने मुझ धमकी दी कि अगर तुने अपने मायके वालों से व पुलिस वालों से बताया तो तुझे मार देगें और तुम्हारे भाई को गुण्डों से उठवा लेगें। दो दिन तक मुझे व मेरे लडके को भूखा प्यासा रखा और एक कमरे में बन्द कर दिया। मैं ये सब बात बतायी तब मेरी मां प्रार्थना लेकर थाने गयी तब थानाध्यक्ष ने मुझे बुलाया। तब मैं उनसे अपनी बात बतायी तब वे दो पुलिस वालों को भेजकर मेरे बच्चे के कपडे और मेरा सामान लेने के लिए मुझे भेजा तो उन लोगों ने मुझे घर में नहीं घुसने दिया, उसके बाद मैं अपने बच्चे को लेकर अपनी ससुराल गयी तब मेरी सास ने मेरे बाल पकड कर अन्दर खींच लिया मेरे बच्चे के नीचे पटक दिया तथा मेरे पति ने गले में रस्सी डालकर गला घोटकर जान से मारने की कोशिश की। अतः आप मेरे पति, सास, दादसरे तथा चाचा आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करें। उक्त तहरीर के आधार पर सम्बन्धित थाना पर मु०अ०सं० ५८९/२०११ अन्तर्गत धारा ४९८ए, ३२३, ५०४, ५०६ भा०दं०सं० व ३/४ दहेज प्रतिषेद्ध अधिनियम बनाम सतपाल आदि पंजीकृत किया गया।

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प्रकरण की विवेचना एस.आई. रेनू सक्सेना को सुपुर्द की गयी। विवेचक द्वारा गवाहों का बयान अंकित किया गया, घटना स्थल का निरीक्षण करके नक्शा नजरी तैयार किया गया तथा अभियुक्तगण के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाते हुए धारा ४९८ए, ३२३, ५०४, ५०६ भा०दं०सं० व ३/४ दहेज प्रतिषेद्ध अधिनियम के अन्तर्गत आरोप पत्र विचारण हेतु इस न्यायालय में प्रेषित किया गया।

अभियुक्तगण सतपाल, श्रीमती ब्रिजेश व सुशील को आहुत किया गया। अभियुक्तगण न्यायालय में उपस्थित आये। अभियुक्तणण पर धारा ४९८ए, ३२३, ५०४, ५०६ भा०दं०सं० व ३/४ दहेज प्रतिषेद्ध अधिनियम के अन्तर्गत आरोप विरचित किया गया, अभियुक्तगण ने आरोपों से इन्कार किया तथा परीक्षण की मांग की।

अभियोजन पक्ष की ओर से अभियुक्तगण के विरूद्ध लगाये गये आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए साक्षी पी.डब्लू. । श्रीमती शिखा, पी.डब्लू. 2 श्रीमती सतवीरी, पी.डब्लू, ३ जगवीर सिंह, पी.डब्लू. ४ विवेचक उप निरीक्षक रेनू सक्सेना को परीक्षित कराया गया है। अन्य कोई साक्षी अभियोजन पक्ष की ओर से परीक्षित नही कराया गया, जिस कारण अभियोजन साक्ष्य का अवसर समाप्त किया गया।

अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के उपरान्त अभियुक्तगण का बयान अर्न्तगत धारा ३१३ दं०प्र०सं० अंकित किया गया, जिसमें उनके द्वारा घटना से इंकार किया गया, तथा सफाई में साक्ष्य देने से भी इन्कार किया गया।

अभियुक्तगण के विद्वान अधिवक्ता तथा अभियोजन पक्ष के तर्को को सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन किया।

पूरा जजमेंट पढ़ने के लिए निचे PDF को पढ़े।

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