State of UP vs Mahendra 498a Judgement

अभियुक्तगण महेन्द्र, हरिओम, विजेन्द्र, नत्था सिह, श्रीमती शान्ति, कु0 रेखा व श्रीमती गीता का परीक्षण पुलिस थाना महिला द्वारा प्रेषित आरोप-पत्र अन्तर्गत धारा 498ए, 323, 504 भा0द0स0 व धारा 3/4 दहेज प्रति0 अधिनियम के आधार पर इस न्यायालय द्वारा किया गया ।

संक्षेप में अभियोजन कथानक इस प्रकार है कि अभियोगी हरप्रसाद के प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा 156(3) दं0प्रएसं) के आधार पर दिनॉक 17-2-2005 को समय 16.10 बजे थाना महिला में अभियोग पंजीकृत हुआ जिसमें अभियोगी का कथन है कि अभियोगी की पुत्री सरोज की शादी महेन्द्र के साथ करीब 5 साल पूर्व हुई थी । शादी में अभियागी ने अपनी पुत्री को सारा सामान कीमती एक लाख रूपये व 25,000 /-रूपये नकद दिये थे, लेकिन सरोज के ससुराल वाले व पति दहेज से खुश नहीं थे वह आये दिन अभियोगी की लड़की को परेशान करते रहते थे तथा मारपीट व गाली गलौंच करते थे तथा मोटर साईकिल की मॉग करते थे व सिलाई मशीन की मॉग करते थे जब उनकी मॉग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने शादी के एक साल बाद लड़की को घर से पहने हुये कपड़ों में निकाल दिया। एक वर्ष तक अभियोगी की लड़की उसके घर पर रही है। अब अभियोगी ने 25,000 /-रूपये का इन्तजाम कर लिया तब अभियोगी अपने रिश्तेदारों व भत्तीजे बॉके लाल को लेकर लड़की को उसकी ससुराल लेकर गया तथा 25,000 /- रूपये महेंन्द्र को देकर कहा बाकी का इन्तजाम नहीं हो सका । जल्दी ही इन्तजाम करके भिजवा देगा । महेन्द्र के पिता नत्था सिह ने कहा कि जल्दी ही इन्तजाम करके भेज देना | वरना सरोज को घर वापस भेज देगें। अभियोगी से रूपयों का इन्तजाम नहीं हो पाया तो एक साल बाद महेन्द्र व उसके भाई हरिओम व विजेन्द्र अभियोगी के घर आये और कहा कि 50,000 /-रूपये का इन्तजाम कर ले तभी सरोज को ले जायेगें। अभियोगी ने बहुत प्रार्थाा की लेकिन वे लोग सरोज को छोड़कर चले गये । करीब एक सप्ताह बाद अभियोगी अपने भतीजे बॉके लाल व मामा के लड़के मेघराज को साथ लेकर सरोज के साथ गये तथा महेन्द्र व नत्था सिह के हाथ पैर जोड़े तथा कहा कि कुछ दिन की मौहलत दो अभियोगी इन्तजाम कर देगा, लेकिन अभियोगी व उसके रिश्तेदारों के सामने ही सरोज की सास शान्ति व ननद गीता व रेखा ने सरोज को लातघूसों से मारापीट व गालियाँ दी तथा अभियोगी को भी गालियाँ देकर घर से निकाल दिया। करीब डेढ़ साल पहले जब सरोज गर्भवती थी तब नत्था सिह व सास शान्ति ने अभियोगी को अपने घर बुलाया तथा कहा कि तुमने रूपये नही दिये है इसलिये उनके पास सरोज की बीमारी पर खर्च करने के लिये रूपये नहीं है इसलिये सरोज को ले जाओ | अभियोगी अपनी लड़की सरोज को लेकर मुरादाबाद आ गया तथा मुरादाबाद में ही उसके लड़की पैदा हुई जिसका सारा खर्चा अभियोगी ने उठाया और न ही उसका पति अथवा कोई अन्य उसे देखने ही आया । एक माह बाद अभियोगी अपनी लड़की सरोज व दूसरी लड़की सुमन को लेकर गया ओर छोड़कर आ गया । दिनॉक 14-4-05 की सुबह करीब 9 बजे महेन्द्र व उसकी माँ बहनों व भाई हरिओम व विजेन्द्र व मोसा रामकुवर व उसकी पत्नि पूरनदेई ने अभियोगी की लड़की को मारपीट कर पहने हुये कपड़ों में गोद की लड़की तनू के साथ घर से निकाल दिया | अभियोगी की लड़की अभियोगी के घर आ गयी । अभियोगी अपनी छोटी लड़की सुमन को लेकर सरकारी अस्पताल गया वहॉ जाकर उसकी चोटों का इलाज कराया तथा रिपोर्ट लिखाने थाने गया लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी | अभियोगी ने एक प्रार्थना-पत्र दिनॉँक 15-1-2005 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिया जिसपर कोई कार्यवाही नहीं हुई अभियोगी के प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा 156(3) दं0प्रएसं० पर न्यायालय के आदेश से अभियोग पंजीकृत हुआ तथा मामले की विवेचना हुई।

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विवेचक द्वारा दौरान विवेचना गवाहान के बयान लिये तथा समस्त विवेचना पूर्ण करने के उपरान्त अभियुकतगण महेन्द्र, हरिओम,विजेन्द्र,नत्था सिह,श्रीमती शान्ति,कु0 रेखा व श्रीमत्ती गीता के विरूद्ध आरोप-पत्र अन्तर्गत धारा 498ए, 323, 504 भा०द0स0 व धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम न्यायालय में प्रेषित किया गया ।

अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 498ए, 323, 504 भा0द0स0 व धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम का आरोप विरचित किया गया जिससे अभियुक्‍तगण द्वारा इन्कार किया गया तथा परीक्षण की मॉँग की ।

परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपने कथानक के समर्थन में पी0डब्लू-1 हरप्रसाद,पी0डब्लू-2 सरोज, पी0डब्लू-3 सुमन ,पी0डब्लू-4 प्रेमशंकर, पी0डब्लू-5 एस0आई0 रानी चौहान, पी0डब्लू-6 डाक्टर बांके लाल, पी0डब्लू-7 कॉ0 श्रीमती ऊषा भाटी को परीक्षित कराया गया है।

बचाव पक्ष की ओर से डी0डब्लू-1 लाल सिह व डी0डब्लू-2 राजेश कुमार को परीक्षित कराया गया है। अभियुक्तगण की ओर से तर्क दिया गया है कि अभियुकतगण को उक्त मामले में झूठा फसाया गया है अभियुक्तगण द्धारा कोई दहेज की मॉग नहीं की गयी है और न ही अभियोगी की पुत्री सरोज को प्रताड़ित किया है। अभियुक्तगण निर्दोष है। अत: अभियुक्तगण को ससम्मान दोष मुक्त किया जाये ।

मैंने अभियुक्तगण के विद्धान अधिवक्ता एवं विद्धान सहायक अभियाजन अधिकारी की बहस सुनी एवं पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य का सम्यक्‌ परिशीलन किया ।

अभियोजन पक्ष की ओर से परीक्षित कराये गये साक्षी संख्या-1 हरप्रसाद ने अपनी मरुय परीक्षा में कहा है कि अभियोगी की पुत्री सरोज की शादी महेन्द्र के साथ करीब 5 साल पूर्व हुई थी । शादी में अभियागी ने अपनी पुत्री को सारा सामान कीमती एक लाख रूपये व 25,000 /-रूपये नकद दिये थे,लेकिन सरोज के ससुराल वाले व पति दहेज से खुश नहीं थे वह आये दिन अभियोगी की लड़की को परेशान करते रहते थे तथा मारपीट व गाली गलौंच करते थे तथा मोटर साईकिल की मॉग करते थे व सिलाई मशीन की मॉग करते थे जब उनकी मॉग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने शादी के एक साल बाद लड़की को घर से पहने हुये कपड़ों में निकाल दिया। एक वर्ष तक अभियोगी की लड़की उसके घर पर रही है। जब अभियोगी ने 25,000/-रूपये का इन्तजाम कर लिया तब अभियोगी अपने रिश्तेदारों व भत्तीजे बॉके लाल को लेकर लड़की को उसकी ससुराल लेकर गया तथा 25,000 /- रूपये महेंन्द्र को देकर कहा बाकी का इन्तजाम नहीं हो सका । जल्दी ही इन्तजाम करके भिजवा देगा । महेन्द्र के पिता नत्था सिह ने कहा कि जल्‍दी ही इन्तजाम करके भेज देना | वरना सरोज को घर वापस भेज देगें। अभियोगी से रूपयों का इन्तजाम नहीं हो पाया तो एक साल बाद महेन्द्र व उसके भाई हरिओम व विजेन्द्र अभियोगी के घर आये और कहा कि 50,000 /-रूपयेका इन्तजाम कर ले तभी सरोज को ले जायेगें। अभियोगी ने बहुत प्रार्थना की लेकिन वे लोग सरोज को छोड़कर चले गये | करीब एक सप्ताह बाद अभियोगी अपने भत्तीजे बॉके लाल व मामा के लड़के मेघराज को साथ लेकर सरोज के साथ गये तथा महेन्द्र व नत्था सिह के हाथ पैर जोड़े तथा कहा कि कुछ दिन की मौहलत दो अभियोगी इन्तजाम कर देगा, लेकिन अभियोगी व उसके रिश्तेदारों के सामने ही सरोज की सास शान्ति व ननद गीता व रेखा ने सरोज को लातघूसों से मारापीट व गालियाँ दी तथा अभियोगी को भी गालियाँ देकर घर से निकाल दिया। करीब डेढ़ साल पहले जब सरोज गर्भवती थी तब नत्था सिह व सास शान्ति ने अभियोगी को अपने घर बुलाया तथा कहा कि तुमने रूपये नही दिये है इसलिये उनके पास सरोज की बीमारी पर खर्च करने के लिये रूपये नहीं है इसलिये सरोज को ले जाओ । अभियोगी अपनी लड़की सरोज को लेकर मुरादाबाद आ गया तथा मुरादाबाद में ही उसके लड़की पैदा हुई जिसका सारा खर्चा अभियोगी ने उठाया और न ही उसका पति अथवा कोई अन्य उसे देखने ही आया । एक माह बाद अभियोगी अपनी लड़की सरोज व…

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पूरा जजमेंट पढ़ने के लिए निचे PDF को पढ़े।

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