Swati vs Sushobit Domestic Violence Judgement

प्रार्थिया श्रीमती स्वाती की ओर से विरूद्ध विपक्षीगण अंतर्गत धारा-12 घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षण दिलाये जाने हेतु तथा भरण-पोषण के सम्बन्ध में अनुतोष प्राप्त करने हेतु यह प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया है।

संक्षेप में प्रार्थना-पत्र का कथानक इस प्रकार है कि प्रार्थिया का विवाह विपक्षी संख्या-1 के साथ दिनांक 08-03-2011 को हुआ था जिसमें प्रार्थिया के पिता द्वारा अपनी दो बीघा जमीन बेच कर लगभग लाख रूपये खर्च किये गये थे। विवाह के उपरान्त विपक्षीगण प्रार्थिया के पिता द्वारा दिये गये सामान से खुश नहीं थे व अधिक दहेज की मांग करने लगे। अप्रैल -2011 में विपक्षी संख्या-1 के द्वारा यह कहा गया कि हम लोग अलग दिल्ली रहेंगे। तुम सारे गहने जेवर मेरे माता पिता को दे दो हमें कुछ नहीं चाहिए। प्रार्थिया द्वारा अपने सभी आभूषण विपक्षी संख्या- 2 व 4 को दे दिये गये। उसके उपरान्त विपक्षी एक प्रार्थिया को मायके छोड़ गया। उसके बाद वह वापस ससुराल चली गयी। जहां पर बीस लाख रूपये की मांग को लेकर विपक्षीगण ने प्रताड़ित किया। दिनांक 16-10-2011 को विपक्षी संख्या-1 ने प्रार्थिया को बैल्टों से बुरी तरह मारा क्‍यों कि अन्य विपक्षीगण ने करवाचौथ का सामान कम आने की शिकायत की थी। मारपीट व गर्भावस्‍था के कारण प्रार्थिया की तबियत ठीक नहीं थी। वह अकेले ही यशोदा अस्पताल गयी। दिनांक 20-10-2011 को विपक्षी संख्या-3 ड्राईवर के साथ विपक्षी को मायके छोड़ गये। दिनांक 30-10-2012 को विपक्षी संख्या-1 की बुआ की मरने पर जब रश्म अदायगी के लिए प्रार्थिया व उसके घर वाले गये तो विपक्षीगण ने उन्हें सबके सामने अपमानित किया। परिवादिया को मेरठ यूनिवर्सिटी से कुछ पैसा मिलता था। विपक्षीगण ने प्रार्थया व विपक्षी संख्या- 3 का संयुक्त खाता खुलवा दिया तथा बैंक की पासबुक व ए.टी.एम. अपने पास रख लिया ताकि परिवादिया पैसे न निकाल सके। दिनांक 26-05-2012 को परिवादिनी ने एक बच्ची को जन्म दिया जिसकी सूचना के बाबजूद विपक्षीगण मिलने नहीं आये न ही खर्चा दिया। दिनांक 03-10-2013 को प्रार्थिया ने विपक्षी संख्या- 1 को पत्र लिखा तथा मिलने भी गयी। माह अक्टूबर -2012 में विपक्षी संख्या-4 अस्पताल में भर्ती थी। जब प्रार्थिया उन्हें देखने गयी तो विपक्षीगण ने सही व्यवहार नहीं किया। माह मार्च 2015 से परिवादिया को स्कालरशिप मिलना बंद हो गया है तथा उसके पास एक बच्ची भी है जबकि विपक्षी संख्या- दिल्ली पुलिस में है तथा पचास हजार रूपये वेतन पाता है तथा विपक्षीगण की साठ बीघा साझा जमीन है वह एक हजार वर्गगज में बड़ा मकान है और डेढ सौ वर्गजग का प्लाट है। विपक्षी संख्या-1 ने परिवादिया को बेवजह छोड रखा है तथा उसका सारा सामान जेवर कपड़ा विपक्षीगण के पास है और प्रार्थिया के पास कोई आय का साधन नहीं है। प्रार्थिया द्वारा निम्न अनुतोष याचित किया गया हैः-

  1. अधिनियम की धारा-8 के तहत विपक्षीगण को प्रार्थिया व उसकी पुत्री के साथ घरेलू हिंसा करने से रोके जाने के सम्बन्ध में संरक्षण आदेश पारित किया जाये।
  2. अधिनियम की धारा-9 के तहत प्रार्थिया के लिए निवास की व्यवस्था अथवा बीस हजार रूपये मासिक किराया दिलाया जाये।
  3. विपक्षीगण को आदेशित किया जाय कि वे प्रार्थिया का समस्त स्त्री धन जो उनके कब्जे में है लौटा दें।
  4. अधिनियम की धारा-20 के तहत प्रार्थिया व उसकी पत्री के लिए अलग- अलग दस-दस रूपये मासिक भरण-पोषण दिलाया जाये।
  5. अधिनियम की धारा-22 के तहत घरेलू हिंसा व मानसिक उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति के लिए मु० 10,00,000/-रूपये दिलाये जाये।
  6. अधिवक्ता फीस के लिए मु० 5,000/-रूपये दिलायें जाये।
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प्रार्थिया द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने के उपरान्त विपक्षीगण को नोटिस प्रेषित किये गये जिनके द्वारा न्यायालय में उपस्थित होकर प्रार्थना-पत्र के विरूद्ध आपत्ति प्रस्तुत की गयी।

विपक्षीगण की आपत्ति निम्नवत हैः-

प्रार्थना-पत्र के पैरा- में शादी की दिनांक व शादी के स्थान को छोड़ कर शेष तथ्य असत्य हैं। विपक्षी संख्या-1 की शादी में किसी प्रकार के दहेज का लेनदेन नहीं किया था। विपक्षीगण के द्वारा परिवादिया को दहेज की मांग को लेकर कभी प्रताड़ित नहीं किया गया। परिवादिया ने कभी कोई गहने जेवर विपक्षीगण को नहीं दिये। विपक्षीगण के द्वारा प्रार्थना-पत्र के सभी प्रस्तरों में अंकित कथनों का खण्डन करते हुए अस्वीकार किया है तथा यह कथन किया है कि प्रार्थिया चतुर चालाक व व्यवसायी महिला है जो नौकरी के कारण विपक्षी संख्या-1 को छोड कर मायके में अलग रह रही है। प्रार्थिया फार्मल लैब में लैब टैक्नीशियन के पद पर कार्यरत है जिससे चालीस हजार मासिक वेतन प्राप्त होता है तथा मु. 25,000/- रूपये ट्यूशन से कमाती है। प्रार्थिया अपना व अपनी पुत्री का भरण-पोषण करने में स्वयं सक्षम है। इसके अलावा परिवादिया के पिता मोहनमीकिन्स से रिटायर हैं तथा उन्हें अच्छी पेंशन मिलती है तथा वे प्रापर्टी डीलिंग व कमीशन एजेंट का काम करते हैं। विपक्षी संख्या- 2 व 4 ने विपक्षी संख्या 1 को अपनी चल व अचल सम्पत्ति से बेदखल कर रखा है जिसका मुकदमा रनवीर बनाम सुशोभित मुकदमा नंबर 1519/2015 सिविल जज (जू० डि०) गाजियाबाद में लम्बित है। प्रार्थना-पत्र निराधार तथ्यों पर प्रस्तुत किया गया है जो खारिज किये जाने योग्य है। प्रार्थिया शादी के बाद विपक्षी संख्या- 1 पर परिवार से अपने हिस्से की जमीन लेकर अलग रहने के लिए दबाब बनाती थी क्‍यों कि वह संयुक्त परिवार में रहना नहीं चाहती थी। जब विपक्षी संख्या- 4 ने अलग होने से मनाकर दिया तो प्रार्थिया गाजियाबाद में फ्लैट खरीदने की मांग करने लगी। असमर्थता जताने पर बात करना बंद कर दिया। प्रार्थिया अक्सर बिना बताये मायके चली जाती थी तथा विपक्षी संख्या-1 के कम पढ़ो लिखा होने का ताना देकर अपमानित करती थी। इसकी शिकायत करने पर प्रार्थिया के माता पिता ने अपनी पुत्री का ही साथ दिया। प्रार्थिया छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई झगडा करती थी घर में कलह रखती थी। प्रार्थिया के द्वारा झूठे मुकदमें में फसाने की धमकी दी जाती थी। दिनांक 28-10-2011 को प्रार्थिया अपने भाई के साथ अपने कपड़े जेवरात और शैक्षणिक प्रमाण-पत्र लेकर मायके चली गयी। प्रार्थिया विपक्षी को ब्लैकमेल करती है इस कारण उसे मधुमेह हो गया है। इसके अलावा किसी भी अवसर पर प्रार्थिया विपक्षी के बुलाने के बाबजूद भी नहीं आयी। प्रार्थिया की डिलीवरी का सम्पूर्ण खर्चा विपक्षीगण ने उठाया था तथा डिस्चार्ज होने के बाद जब घर चलने के लिए कहा गया तो प्रार्थिया ने साफ इंकार कर दिया। दिनांक 03-05-2015 को प्रार्थिया को लेने जब विपक्षी गया तो उसने साथ आने से साफ इंकार कर दिया व मारने की कोशिश की। प्रार्थिया पढीलिखी व्यवसायी महिला है तथा बिना कारण अपने मायके में रह रही है। इस कारण वह विपक्षीगण के विरूद्ध कोई अनुतोष प्राप्त करने की हकदार नहीं है। इस कारण भी प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र खारिज किये जाने योग्य है।…

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पूरा जजमेंट पढ़ने के लिए निचे PDF को पढ़े।

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